केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए — चिकित्सा सलाह नहीं
कितनी गंभीर?
मृत्यु का जोखिम
हाँ
टीका उपलब्ध?
लक्षणों तक समय
प्रभावित देश
सक्रिय प्रकोप
सुनिश्चित करें कि Tdap बूस्टर वर्तमान है (हर 10 वर्ष)। पर्टुसिस विश्व स्तर पर स्थानिक है और सभी देशों में प्रकोप होते हैं। छोटे शिशुओं के साथ या उनसे मिलने यात्रा करते समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण। "100-दिन की खाँसी" यात्रा योजनाओं को काफी प्रभावित कर सकती है।
अत्यधिक संक्रामक श्वसन संक्रमण जो गंभीर, लंबे समय तक खाँसी का कारण बनता है। शिशुओं में जीवन-घातक हो सकता है।
काली खाँसी (कूकर खाँसी) Bordetella pertussis द्वारा उत्पन्न। अत्यधिक संक्रामक (R₀ 12–17)। विशिष्ट: श्वसनीय सीटी ("हूप") के साथ दौरेदार खाँसी। <6 माह शिशुओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक। ~1,60,000 मृत्यु/वर्ष (मुख्यतः निम्न-आय देशों में शिशु)। DTPa/Tdap टीके से रोकथाम योग्य।
काली खाँसी (Pertussis / Whooping Cough / कुकुर खाँसी) बोर्डेटेला परटसिस (Bordetella pertussis) जीवाणु द्वारा होने वाला अत्यंत संक्रामक श्वसन संक्रमण है। घरेलू संपर्कों में संचरण दर: 80-90%। 6 माह से कम आयु के शिशुओं में सबसे खतरनाक (90% मृत्यु इसी आयु वर्ग में)। 2010 के बाद विश्व भर में पुनरुत्थान। भारत में काली खाँसी IDSP/IHIP अंतर्गत रिपोर्ट योग्य है, किंतु काफ़ी कम-रिपोर्ट (under-reported) माना जाता है।
शिशु में श्वास-रोध/नीलापन (cyanosis)। दौरे। भोजन लेने में असमर्थता। बुखार >38.5°C + खाँसी (निमोनिया संदेह)। तत्काल अस्पताल।
सबसे सामान्य संकेत और लक्षण
तीन चरण:
नज़ला अवस्था (Catarrhal — 1-2 सप्ताह): साधारण सर्दी-ज़ुकाम जैसा — सबसे संक्रामक अवस्था
ऐंठनकारी अवस्था (Paroxysmal — 2-8 सप्ताह): खाँसी के तीव्र दौरे + "हूप" (whooping) ध्वनि (शिशुओं में अनुपस्थित हो सकती है) + खाँसी के बाद उल्टी। शिशुओं में: श्वास-रोध (apnea) — बिना हूप के
स्वास्थ्य-लाभ अवस्था (Convalescent — 2-6 सप्ताह): धीरे-धीरे सुधार, लेकिन खाँसी महीनों तक ("100 दिनों की खाँसी")
लक्षणों को जानना तेज़ प्रतिक्रिया की दिशा में पहला कदम है।
रोग का सामान्य क्रम:
असामान्य प्रस्तुतियाँ: वयस्कों और टीकाकृत बच्चों में अक्सर क्लासिक हूपिंग के बिना लंबी खाँसी होती है। 3 महीने से कम शिशुओं में खाँसी के बजाय श्वसन रुकावट (apnea) हो सकती है।
इस बीमारी की पहचान कैसे की जाती है
निदान:
नासोफैरिंजियल (nasopharyngeal) स्वैब से PCR — सबसे संवेदनशील
संवर्धन (Bordet-Gengou अगार) — विशिष्ट लेकिन कम संवेदनशील
सीरोलॉजी (anti-PT IgG) — देर से निदान में उपयोगी
भारत में: अधिकांश मामले नैदानिक निदान पर आधारित
उपलब्ध उपचार विधियाँ
एंटीबायोटिक:
एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin) 5 दिन — प्रथम पंक्ति, <1 माह के शिशुओं में भी सुरक्षित
क्लेरिथ्रोमाइसिन (Clarithromycin) 7 दिन
6 माह से कम सभी शिशुओं का अस्पताल में भर्ती
निरंतर निगरानी (श्वास-रोध/apnea हेतु)
सभी घरेलू संपर्कों को एंटीबायोटिक प्रोफिलैक्सिस
अधिकांश मामलों का शीघ्र निदान से प्रभावी उपचार किया जाता है।
अपनी सुरक्षा कैसे करें
भारत का UIP:
DPT (पूर्ण कोशिका — wP): 6, 10, 14 सप्ताह + बूस्टर 16-24 माह + 5 वर्ष
निजी क्षेत्र: DTaP (अकोशिका — aP) उपलब्ध
Tdap गर्भवती महिलाओं को: प्रत्येक गर्भावस्था में (20-36 सप्ताह) — IAP अनुशंसा; भारत में अभी UIP में शामिल नहीं
कोकून रणनीति (Cocoon strategy): नवजात के आसपास सभी वयस्कों का Tdap टीकाकरण
तैयारी सबसे अच्छी सुरक्षा है।
यात्रा से पहले Tdap बूस्टर सुनिश्चित करें (यदि 10+ वर्ष पहले अंतिम खुराक)। शिशुओं के साथ यात्रा: सभी सहयात्रियों का Tdap टीकाकरण।
सांख्यिकी और भौगोलिक डेटा
भारत: सटीक बोझ अज्ञात (कम-रिपोर्टिंग)। अनुमानतः लाखों मामले प्रतिवर्ष। DPT कवरेज ~90% (राष्ट्रीय) लेकिन प्रतिरक्षा 5-10 वर्षों में क्षीण होती है। किशोरों और वयस्कों में काफ़ी प्रचलित (अक्सर "लगातार खाँसी" के रूप में अनदेखा)।
सबसे अधिक जोखिम में कौन है
बिना टीकाकरण/अपूर्ण टीकाकरण शिशु, क्षीण प्रतिरक्षा (टीकाकरण के 5–10 वर्ष बाद), संक्रमित घर के सदस्य से संपर्क, भीड़भाड़।
संभावित जटिलताएँ
जटिलताएँ (शिशुओं में सबसे गंभीर):
श्वास-रोध (apnea) — शिशुओं में मृत्यु का प्रमुख कारण
निमोनिया (द्वितीयक जीवाणु संक्रमण)
दौरे (seizures)
एन्सेफैलोपैथी
पसली भंग (rib fractures — गंभीर खाँसी से)
मृत्यु दर: <1 वर्ष शिशुओं में 1-2%
अपेक्षित परिणाम और स्वास्थ्य लाभ
6 महीने से कम शिशु: सर्वाधिक रुग्णता और मृत्यु दर। अटीकाकृत शिशुओं में CFR 1–3%। काली खाँसी मृत्यु का प्रमुख कारण।
बड़े बच्चे और वयस्क: शायद ही कभी घातक लेकिन लंबी रुग्णता। "100-दिन की खाँसी।"
जटिलताएँ:
निमोनिया (शिशुओं में मृत्यु का सबसे सामान्य कारण): 5–10%।
दौरे: 1–2%, आमतौर पर ज्वर संबंधी।
एन्सेफैलोपैथी: 0.1–0.3%।
पसली का भंग, हर्निया, उपनेत्रश्लेष्मा रक्तस्राव (तीव्र खाँसी से)।
काली खाँसी के बाद खाँसी अतिसंवेदनशीलता महीनों तक बनी रह सकती है।
प्रतिरक्षा: प्राकृतिक संक्रमण से 7–20 वर्ष की सुरक्षा। टीका-प्रेरित प्रतिरक्षा 5–10 वर्षों में क्षीण होती है।
यह रोग टीकाकरण से रोका जा सकता है। प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध है।
अपनी यात्रा से पहले ट्रैवल हेल्थ विशेषज्ञ से अनुशंसित शेड्यूल के बारे में बात करें।
टीकाकरण क्लिनिक खोजें →इस पृष्ठ की सामग्री केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार की सिफारिश नहीं है। यदि आपको स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ हैं, तो किसी योग्य स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श करें। Medova कोई चिकित्सा सेवा प्रदाता नहीं है।
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Source: WHO GHO OData ↗
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