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कितनी गंभीर?
मृत्यु का जोखिम
हाँ
टीका उपलब्ध?
लक्षणों तक समय
प्रभावित देश
सक्रिय प्रकोप
खसरा अत्यधिक संक्रामक है और दुनिया भर में प्रकोप होते हैं। यात्रा से पहले अपनी MMR टीकाकरण स्थिति सत्यापित करें (2 खुराकें आवश्यक)। बिना टीकाकरण वाले यात्रियों को भीड़भाड़ वाले स्थानों में काफी जोखिम होता है। संपर्क के बाद 72 घंटों के भीतर टीकाकरण बीमारी रोक सकता है।
अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग जो बुखार, दाने और श्वसन लक्षण उत्पन्न करता है। विज्ञान में ज्ञात सबसे संक्रामक रोगजनकों में से एक (R0 = 12–18)।
लक्षण | आवृत्ति | गंभीरता | शुरुआत |
|---|---|---|---|
| नेत्रश्लेष्मलाशोथ | 92% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| खांसी | 95% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| तेज बुखार | 98% | गंभीर | प्रारंभिक चरण |
| अस्वस्थता | 85% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| नाक बहना | 90% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| सिरदर्द | 50% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| चिड़चिड़ापन | 60% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| अत्यधिक आंसू आना | 60% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| भूख न लगना | 70% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| प्रकाश भीति | 50% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| मांसपेशियों में दर्द | 35% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| गले में खराश | 40% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| मैकुलोपैपुलर दाने | 99% | हल्का | चरम चरण |
| सूजी हुई लसीका ग्रंथियां | 50% | हल्का | चरम चरण |
| पेट दर्द | 20% | हल्का | चरम चरण |
| दस्त | 8% | हल्का | चरम चरण |
| उल्टी | 15% | हल्का | चरम चरण |
| थकान | 80% | हल्का | कोई भी चरण |
खसरा खसरा मोर्बिलीवायरस (Paramyxoviridae कुल) द्वारा उत्पन्न एक अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग है। R₀ 12–18 होने के कारण यह ज्ञात सबसे संक्रामक मानव रोगजनकों में से एक है। वायरस श्वसन बूँदों और एरोसोल के माध्यम से फैलता है — संक्रमित व्यक्ति के जाने के 2 घंटे बाद तक वायु में संक्रामक रहता है। 2021 में अनुमानित 1,28,000 मृत्यु, मुख्यतः निम्न-आय वाले देशों में बिना टीकाकरण/कुपोषित बच्चों में। दो-खुराक MMR टीकाकरण ने 2000 के बाद से वैश्विक खसरा मृत्यु दर में 73% से अधिक की कमी की है।
खसरा (Measles) एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है जो मीज़ल्स मॉर्बिलिवायरस (Measles morbillivirus) द्वारा होता है, जो पैरामिक्सोविरिडी (Paramyxoviridae) परिवार से संबंधित है। यह विज्ञान में ज्ञात सबसे संक्रामक रोगों में से एक है, जिसका मूल प्रजनन संख्या (R0) 12 से 18 के बीच है — अर्थात एक संक्रमित व्यक्ति औसतन 12-18 अतिसंवेदनशील लोगों को संक्रमित कर सकता है। यह श्वसन बूंदों (respiratory droplets) और वायुजनित कणों (aerosol) द्वारा फैलता है, और वायरस संक्रमित व्यक्ति के जाने के बाद भी हवा में 2 घंटे तक सक्रिय रह सकता है।
संक्रामकता अवधि चकत्ते (rash) प्रकट होने से 4 दिन पहले से लेकर 4 दिन बाद तक रहती है। 1963 से प्रभावी टीका उपलब्ध होने के बावजूद, खसरा विश्व भर में बच्चों में टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है। WHO ने 2023 में लगभग 10.3 मिलियन मामलों और 107,500 मृत्यु का अनुमान लगाया है।
भारत के संदर्भ में: भारत विश्व स्तर पर खसरे के सबसे अधिक मामलों वाले देशों में से एक रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने 2023 में मिशन इंद्रधनुष (Mission Indradhanush) के अंतर्गत टीकाकरण अभियान को तीव्र किया है। भारत का खसरा-रूबेला (MR) उन्मूलन लक्ष्य बढ़ाया गया है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (UIP — Universal Immunisation Programme) के तहत MR टीका 9-12 महीने और 16-24 महीने पर दिया जाता है। 2023-2024 में भारत में कई राज्यों (महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, गुजरात) में खसरे के प्रकोप दर्ज हुए, जो कम टीकाकरण कवरेज वाले क्षेत्रों में केंद्रित थे।
ICMR (Indian Council of Medical Research) के अनुसार, भारत में खसरे के उन्मूलन के लिए MR टीके की दो खुराकों के साथ ≥95% टीकाकरण कवरेज आवश्यक है। NCDC (National Centre for Disease Control) के माध्यम से एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत खसरा अनिवार्य रूप से रिपोर्ट योग्य रोग है।
तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें यदि निम्न लक्षण दिखें:
साँस लेने में कठिनाई या तेज़ साँस (निमोनिया का संकेत)
तीव्र सिरदर्द या गर्दन में कड़ापन या चेतना में परिवर्तन (एन्सेफलाइटिस का संकेत)
दौरे (seizures/convulsions)
पीने में असमर्थता या लगातार उल्टी
गंभीर निर्जलीकरण (dehydration) के लक्षण — धँसी हुई आँखें, पेशाब न होना, अत्यधिक सुस्ती
तुरंत नज़दीकी अस्पताल या आपातकालीन विभाग जाएँ। भारत में: 108 (एम्बुलेंस), 104 (स्वास्थ्य हेल्पलाइन)
सबसे सामान्य संकेत और लक्षण
उद्भवन काल (Incubation period): 10-14 दिन
प्रारंभिक अवस्था (Prodromal phase — 2-4 दिन):
तेज़ बुखार (40°C / 104°F तक पहुँच सकता है)
लगातार खाँसी, नाक बहना (coryza) और आँखों का लाल होना (conjunctivitis) — क्लासिक त्रय (classic triad)
कोपलिक धब्बे (Koplik's spots) — गाल की भीतरी सतह (buccal mucosa) पर दाढ़ के पास नीले-सफ़ेद धब्बे — यह रोग-विशिष्ट (pathognomonic) लक्षण है जो चकत्ते से 1-2 दिन पहले दिखाई देता है
प्रकाश-भीति (photophobia), सामान्य कमज़ोरी (malaise), भूख न लगना
चकत्ता अवस्था (Exanthem phase — 4-7 दिन):
मैकुलोपैपुलर चकत्ते (maculopapular rash) — कानों के पीछे और बालों की रेखा से शुरू होकर, सिर से नीचे की ओर 3-4 दिनों में शरीर (trunk) और अंगों (extremities) तक फैलते हैं
चकत्ते की शुरुआत के साथ बुखार चरम पर पहुँचता है
सामान्यीकृत लिम्फैडेनोपैथी (lymphadenopathy); प्लीहा का बढ़ना (splenomegaly) हो सकता है
चकत्ते उसी क्रम में हल्के छिलके (fine desquamation) के साथ मिटते हैं
स्वास्थ्य-लाभ अवस्था (Convalescence — 1-3 सप्ताह):
चकत्ते शुरू होने के 3-4 दिन बाद बुखार उतरता है
"प्रतिरक्षा स्मृति-लोप" (immune amnesia) — वायरस पहले से मौजूद प्रतिरक्षा स्मृति कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे 11-73% एंटीबॉडी भंडार समाप्त हो जाता है (Mina et al., Science 2019)
भारत-विशिष्ट: कुपोषित बच्चों में (विशेषकर विटामिन A की कमी वाले) लक्षण अधिक गंभीर होते हैं। NFHS-5 के अनुसार भारत में 35.5% बच्चे (5 वर्ष से कम) कम वज़न के हैं, जो खसरे की गंभीरता बढ़ाता है।
लक्षणों को जानना तेज़ प्रतिक्रिया की दिशा में पहला कदम है।
रोग का सामान्य क्रम:
संक्रामकता: दाने आने के 4 दिन पहले से 4 दिन बाद तक। पूर्वलक्षण चरण में सर्वाधिक संक्रामक। मूल प्रजनन संख्या (R₀): 12–18 (मानव के सबसे संक्रामक रोगजनकों में से एक)।
इस बीमारी की पहचान कैसे की जाती है
नैदानिक निदान (Clinical diagnosis): तेज़ बुखार + त्रय (खाँसी, नाक बहना, नेत्रशोथ) + मैकुलोपैपुलर चकत्ते जो ऊपर से नीचे फैलें — एक गैर-टीकाकृत व्यक्ति में निदान का प्रबल संदेह। कोपलिक धब्बे (Koplik's spots) रोग-विशिष्ट हैं।
प्रयोगशाला पुष्टि (अनिवार्य):
खसरा-विशिष्ट IgM एंटीबॉडी (ELISA): चकत्ते के तीसरे दिन से सकारात्मक। संवेदनशीलता >90%।
RT-PCR: नासोफैरिंजियल स्वैब (nasopharyngeal swab) या मूत्र से — सबसे अधिक संवेदनशील, जीनोटाइप निर्धारित करता है।
जोड़ीदार IgG (Paired IgG): दो नमूनों में ≥4 गुना वृद्धि।
भारत में रिपोर्टिंग: IDSP (Integrated Disease Surveillance Programme) / IHIP (Integrated Health Information Platform) के अंतर्गत तत्काल अनिवार्य रिपोर्टिंग। प्रत्येक संदिग्ध मामले की प्रयोगशाला पुष्टि अनिवार्य। NCDC के मार्गदर्शन अनुसार सभी प्रकोपों की जाँच आवश्यक।
उपलब्ध उपचार विधियाँ
उपचार — केवल सहायक (कोई एंटीवायरल उपलब्ध नहीं):
विटामिन A अनुपूरक (WHO/ICMR अनुशंसा): 200,000 IU मौखिक, लगातार 2 दिन (≥12 माह के बच्चों को)। 6-11 माह: 100,000 IU। मृत्यु दर 50% तक कम करता है। भारत में विटामिन A की कमी प्रचलित है, इसलिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
ज्वरनाशक (antipyretics) — पैरासिटामोल (paracetamol) या आइबुप्रोफेन (ibuprofen); बच्चों में एस्पिरिन वर्जित (Reye syndrome का जोखिम)
पर्याप्त जलयोजन (hydration) और पोषण सहायता — ORS (Oral Rehydration Solution) भारत में सर्वत्र उपलब्ध
द्वितीयक जीवाणु संक्रमण (secondary bacterial infections) के लिए एंटीबायोटिक्स — मध्य कर्णशोथ (otitis media), निमोनिया (pneumonia)
जटिल मामलों (एन्सेफलाइटिस, निमोनिया, गंभीर निर्जलीकरण) में अस्पताल में भर्ती
भारत में उपलब्धता: विटामिन A अनुपूरक कार्यक्रम (VAS) सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनवाड़ी केंद्रों और ASHA कार्यकर्ताओं के माध्यम से उपलब्ध है।
अधिकांश मामलों का शीघ्र निदान से प्रभावी उपचार किया जाता है।
अपनी सुरक्षा कैसे करें
टीकाकरण — सबसे प्रभावी उपाय:
MR टीका (खसरा-रूबेला) दो खुराकों के बाद >97% सुरक्षा प्रदान करता है।
भारत का राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (UIP — Universal Immunisation Programme):
पहली खुराक: MR टीका 9-12 महीने पर
दूसरी खुराक: MR टीका 16-24 महीने पर
कैच-अप अभियान: मिशन इंद्रधनुष (Mission Indradhanush) — 2014 से चल रहा टीकाकरण तीव्रीकरण अभियान
गहन मिशन इंद्रधनुष (IMI) 3.0 और 4.0: उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और छूटे हुए बच्चों पर विशेष ध्यान
राष्ट्रव्यापी MR अभियान: 2017-2019 में भारत ने विश्व का सबसे बड़ा MR टीकाकरण अभियान चलाया — 32.4 करोड़ से अधिक बच्चों (9 माह-15 वर्ष) को टीका लगाया गया।
संपर्क-पश्चात रोकथाम (Post-exposure prophylaxis):
संपर्क के 72 घंटे के भीतर MR टीका
उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए 6 दिनों के भीतर इम्यूनोग्लोबुलिन
सामूहिक प्रतिरक्षा सीमा (Herd immunity threshold): दो खुराकों के साथ ~95%
तैयारी सबसे अच्छी सुरक्षा है।
यात्रियों के लिए जोखिम:
किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा से पहले MR/MMR टीके की दो खुराक सुनिश्चित करें
भारत से यात्रा करने वाले: प्रस्थान से पहले टीकाकरण स्थिति जाँचें — भारत में कई वयस्कों को बचपन में केवल एक खुराक मिली हो सकती है
उच्च जोखिम: उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, संघर्ष-प्रभावित क्षेत्र
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में यात्रा करने वाले शिशुओं को 6 माह की आयु से MR टीका दिया जा सकता है ("शून्य खुराक" — यह नियमित अनुसूची को प्रतिस्थापित नहीं करता)
भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्री: सुनिश्चित करें कि आपका MMR टीकाकरण पूर्ण है — कई राज्यों में प्रकोप हो सकते हैं
सांख्यिकी और भौगोलिक डेटा
WHO ने 2023 में विश्व स्तर पर ~10.3 मिलियन खसरे के मामलों और ~107,500 मृत्यु का अनुमान लगाया। भारत: ऐतिहासिक रूप से विश्व में सबसे अधिक मामलों वाला देश; 2023 में IDSP/IHIP के अनुसार हज़ारों पुष्ट मामले दर्ज हुए। 2023-2024 में महाराष्ट्र (मुंबई), झारखंड, बिहार और गुजरात में प्रमुख प्रकोप। UIP के अंतर्गत MR प्रथम खुराक कवरेज ~93% (2023), किंतु दूसरी खुराक कवरेज ~83% — लक्ष्य ≥95% से कम। खसरा-रूबेला उन्मूलन लक्ष्य बढ़ाया गया। ICMR और WHO-SEARO सक्रिय निगरानी और प्रकोप प्रतिक्रिया में सहायता कर रहे हैं।
सबसे अधिक जोखिम में कौन है
संक्रमण: टीकाकरण न होना (संपर्क में >90% संक्रमण जोखिम), अंतर्राष्ट्रीय यात्रा, सामूहिक आवास, अपर्याप्त टीकाकरण कवरेज। गंभीर रोग: <5 या >20 वर्ष की आयु, कुपोषण (विटामिन A की कमी), प्रतिरक्षादमन, गर्भावस्था।
संभावित जटिलताएँ
जटिलताएँ — शिशुओं, कुपोषित बच्चों और प्रतिरक्षा-दमित व्यक्तियों में अधिक सामान्य और गंभीर:
मध्य कर्णशोथ (Otitis media): सबसे सामान्य जटिलता (7-9%)
निमोनिया (Pneumonia): खसरे से मृत्यु का प्रमुख कारण (5%)। भारत में बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण — खसरा-संबंधित निमोनिया विशेष रूप से घातक।
तीव्र पश्च-संक्रामक एन्सेफलाइटिस (Acute post-infectious encephalitis): प्रति 1,000 मामलों में 1। मृत्यु दर 10-15%, 25% में स्नायविक क्षति (neurological sequelae)।
सबएक्यूट स्क्लेरोज़िंग पैनएन्सेफलाइटिस (SSPE): संक्रमण के 7-10 वर्ष बाद प्रकट होने वाला घातक अपक्षयी मस्तिष्क रोग। भारत में SSPE की दर विश्व में सर्वाधिक में से एक है।
अंधापन: विटामिन A की कमी से खसरे के कारण बढ़ जाता है — भारत में बचपन के अंधेपन का प्रमुख रोकथाम-योग्य कारण।
"प्रतिरक्षा स्मृति-लोप" (Immune amnesia): प्रतिरक्षा स्मृति कोशिकाओं का महीनों या वर्षों तक विनाश।
मृत्यु दर: विकसित देश: 1-2/1,000। विकासशील देश: 3-5% (कुपोषित जनसंख्या में 30% तक)। भारत में खसरे से होने वाली मृत्यु का अनुपातहीन बोझ कुपोषण और विटामिन A की कमी से जुड़ा है।
अपेक्षित परिणाम और स्वास्थ्य लाभ
समग्र पूर्वानुमान: सहायक देखभाल तक पहुँच रखने वाले सुपोषित व्यक्तियों में अनुकूल। उच्च-आय वाले देशों में मामला मृत्यु दर (CFR) <0.1% है, लेकिन संसाधन-सीमित परिवेश में 3–6% है, और कुपोषित बच्चों तथा विस्थापित आबादी में 25% तक बढ़ जाती है।
पूर्वानुमान को प्रभावित करने वाली जटिलताएँ:
निमोनिया (खसरा मृत्यु का सबसे सामान्य कारण): 1–6% मामलों में।
एन्सेफलाइटिस: ~1,000 में से 1 मामले में; 15% मृत्यु दर, 25% स्थायी तंत्रिका संबंधी विकार।
सबएक्यूट स्क्लेरोज़िंग पैनेन्सेफलाइटिस (SSPE): घातक अपक्षयी CNS रोग, संक्रमण के 7–10 वर्ष बाद शुरू होता है। घटना दर: ~10,000 खसरा मामलों में 1 (2 वर्ष की आयु से पहले संक्रमण होने पर अधिक)।
प्रतिरक्षा विस्मृति: खसरा मौजूदा एंटीबॉडी भंडार का 11–73% नष्ट कर देता है, जिससे ठीक होने के बाद 2–3 वर्षों तक अन्य संक्रमणों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
स्वस्थता: अधिकांश जटिलता-रहित मामले 7–10 दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। प्राकृतिक संक्रमण के बाद आजीवन प्रतिरक्षा।
यह रोग टीकाकरण से रोका जा सकता है। प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध है।
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Source: WHO GHO OData ↗
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