अवलोकन
घातक विषाणुजनित संक्रमण जो संक्रमित जानवर के काटने से फैलता है। लक्षण प्रकट होने पर लगभग 100% मृत्यु दर। तत्काल PEP से रोकथाम योग्य।
लक्षण
लक्षण | आवृत्ति | गंभीरता | शुरुआत |
|---|---|---|---|
| संवेदन विकार | 70% | मध्यम | प्रारंभिक चरण |
| थकान | 45% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| सिरदर्द | 50% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| अस्वस्थता | 55% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| बुखार | 80% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| भूख न लगना | 40% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| मतली | 30% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| निगलने में कठिनाई | 50% | गंभीर | चरम चरण |
| भ्रम | 70% | गंभीर | चरम चरण |
| चिड़चिड़ापन | 65% | मध्यम | चरम चरण |
| पक्षाघात | 20% | गंभीरतम | चरम चरण |
| तेज बुखार | 55% | मध्यम | चरम चरण |
| प्रकाश भीति | 30% | हल्का | चरम चरण |
| दौरे | 20% | गंभीर | चरम चरण |
| क्षिप्रहृदयता | 60% | मध्यम | चरम चरण |
| कंपन | 35% | मध्यम | चरम चरण |
| चक्कर आना | 25% | हल्का | चरम चरण |
| उल्टी | 25% | हल्का | चरम चरण |
| चेतना में परिवर्तन | 90% | गंभीरतम | अंतिम चरण |
| सांस की तकलीफ | 60% | गंभीरतम | अंतिम चरण |
| निम्न रक्तचाप | 40% | गंभीर | अंतिम चरण |
संचरण
अवलोकन
रेबीज रेबीज वायरस (Lyssavirus, Rhabdoviridae कुल) द्वारा उत्पन्न एक विषाणुजनित एन्सेफलाइटिस है। संक्रमित जानवरों (मुख्यतः कुत्ते, चमगादड़) की लार से संचरण। लक्षण प्रकट होने पर रेबीज लगभग हमेशा घातक है (CFR >99.9%)। अनुमानित 59,000 मृत्यु/वर्ष, >95% एशिया और अफ्रीका में। समय पर PEP से पूर्णतः रोका जा सकता है।
अवलोकन
रेबीज़ (Rabies) एक वायरल एंसेफ़ेलाइटिस (viral encephalitis) है जो रेबीज़ वायरस (Lyssavirus) द्वारा होता है। लक्षण प्रकट होने के बाद लगभग 100% घातक। भारत विश्व में रेबीज़ से सबसे अधिक मृत्यु वाला देश है — अनुमानित ~20,000 मृत्यु/वर्ष (वैश्विक मृत्यु का ~36%)। संचरण: संक्रमित जानवर (मुख्यतः कुत्ते) के काटने या खरोंच से। भारत में ~95% मामले आवारा कुत्तों (stray dogs) के काटने से। लाखों पशु-काटने की घटनाएँ प्रतिवर्ष — ARV (Anti-Rabies Vaccine) की भारी माँग। PEP (Post-Exposure Prophylaxis — काटने के बाद का उपचार) लक्षण आने से पहले दिया जाए तो 100% प्रभावी। भारत सरकार का लक्ष्य: 2030 तक कुत्ते से मध्यस्थ रेबीज़ उन्मूलन (dog-mediated rabies elimination) — WHO/OIE/FAO "Zero by 30" कार्यक्रम। ICMR गाइडलाइन (National Rabies Guidelines, 2019): अद्यतन PEP प्रोटोकॉल।
आपातकालीन संकेत
पशु (कुत्ता/बंदर/चमगादड़) का काटना/खरोंच → तुरंत: साबुन-पानी से 15 मिनट धुलाई + अस्पताल (PEP उसी दिन)। खतरनाक संकेत (लक्षण शुरू): पानी से डर (जलभीति/hydrophobia), हवा से डर (वायुभीति/aerophobia), अत्यधिक लार, उत्तेजना/आक्रामकता, काटने की जगह पर दर्द/झुनझुनी — ये संकेत दिखें तो बहुत देर हो चुकी है (लक्षण के बाद = मृत्यु)। इसीलिए PEP में कोई देरी स्वीकार्य नहीं।
विस्तृत लक्षण
सबसे सामान्य संकेत और लक्षण
उद्भवन काल (incubation period): आमतौर पर 1-3 महीने (2 सप्ताह से 1 वर्ष तक — काटने के स्थान पर निर्भर
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चेहरे/सिर के काटने में छोटा)। प्रारंभिक लक्षण: काटने के स्थान पर दर्द, झुनझुनी या खुजली (paraesthesia)
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बुखार, थकान, अस्वस्थता। उग्र रेबीज़ (furious rabies — 80%): जलभीति (hydrophobia) — पानी निगलने या देखने पर गले की मांसपेशियों में ऐंठन
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वायुभीति (aerophobia) — हवा के झोंके से ऐंठन
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उत्तेजना (agitation), आक्रामकता, भ्रम, मतिभ्रम
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अत्यधिक लार (hypersalivation)। लकवाग्रस्त रेबीज़ (paralytic rabies — 20%): अंगों में बढ़ता हुआ पक्षाघात (ascending paralysis)
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GBS (Guillain-Barré Syndrome) जैसा — ग़लत निदान संभव। दोनों रूप: कोमा → 7-14 दिनों में मृत्यु।
लक्षणों को जानना तेज़ प्रतिक्रिया की दिशा में पहला कदम है।
रोग का क्रम
रोग का सामान्य क्रम:
- ऊष्मायन अवधि: 1–3 महीने (सीमा: 5 दिन से >1 वर्ष)। दूरस्थ काटने (पैर) से अधिक लंबी, समीपस्थ/सिर के काटने से कम। वायरल इनोक्युलम के व्युत्क्रमानुपाती।
- पूर्वलक्षण चरण (2–10 दिन): अविशिष्ट: बुखार, अस्वस्थता, सिरदर्द। विशिष्ट संकेत: काटने की जगह पर संवेदनाहीनता/दर्द/खुजली (50–80% में उपस्थित)।
- तीव्र तंत्रिका चरण (2–7 दिन): दो नैदानिक रूप:
- उग्र (एन्सेफैलिटिक) रेबीज़ (80%): जलभीति (निगलने या हवा के झोंकों से उत्पन्न दर्दनाक ग्रसनी ऐंठन), वायुभीति, उत्तेजना, अतिसक्रियता, उतार-चढ़ाव वाली चेतना, स्वायत्त तंत्रिका शिथिलता।
- पक्षाघाती (मूक) रेबीज़ (20%): काटे गए अंग से शुरू होकर आरोही शिथिल पक्षाघात, Guillain-Barré सिंड्रोम की नकल। कोई जलभीति नहीं।
- कोमा और मृत्यु (दिन 7–14): प्रगतिशील कोमा, श्वसन विफलता, हृदय अतालता।
अवसर की खिड़की: संपर्क के बाद जितनी जल्दी हो सके PEP शुरू करना चाहिए — ऊष्मायन अवधि ही रोग को रोकने का एकमात्र अवसर है।
निदान
इस बीमारी की पहचान कैसे की जाती है
नैदानिक निदान (clinical diagnosis): जलभीति + पशु-काटने का इतिहास — अत्यंत विशिष्ट (pathognomonic)। प्रयोगशाला: DFA (Direct Fluorescent Antibody) — त्वचा बायोप्सी (गर्दन के पीछे के बाल)। RT-PCR: लार, CSF। नेग्री बॉडीज़ (Negri bodies): मस्तिष्क ऊतक में (पोस्टमॉर्टम)। सीरोलॉजी: RFFIT/FAVN — टीकाकरण प्रतिक्रिया जाँच। भारत में: NIMHANS (बेंगलुरु), NIV (पुणे) — रेबीज़ रेफ़रेंस प्रयोगशालाएँ।
उपचार
उपलब्ध उपचार विधियाँ
लक्षण प्रकट होने के बाद कोई प्रभावी उपचार नहीं — मृत्यु निश्चित (Milwaukee Protocol: विवादास्पद, 1 जीवित)। रोकथाम ही उपचार है — PEP (Post-Exposure Prophylaxis): चरण 1: घाव धुलाई (wound washing) — साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट + पोविडोन-आयोडीन (betadine)
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चरण 2: एंटी-रेबीज़ वैक्सीन (ARV) — इंट्राडर्मल (ID) रूट: 0.1 मिलीलीटर 2 स्थानों पर — दिन 0, 3, 7, 28 (ICMR प्रोटोकॉल — सस्ता, WHO अनुमोदित)
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इंट्रामस्कुलर (IM) रूट: 1 मिलीलीटर — दिन 0, 3, 7, 14, 28 (Essen regimen)
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चरण 3 (श्रेणी III — गंभीर): रेबीज़ इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) — eRIG (equine) या HRIG (human) — घाव के चारों ओर इंजेक्ट करें। WHO श्रेणियाँ: श्रेणी I: छूना/चाटना (अक्षत त्वचा) → कोई PEP नहीं
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श्रेणी II: छोटी खरोंच/काटना (बिना रक्तस्राव) → ARV
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श्रेणी III: गहरा काटना/खरोंच (रक्तस्राव), श्लेष्म झिल्ली सम्पर्क → ARV + RIG। भारतीय संदर्भ: ID रूट — भारत में प्राथमिक (सस्ता, कम वैक्सीन)
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सरकारी अस्पतालों में मुफ़्त ARV उपलब्ध।
अधिकांश मामलों का शीघ्र निदान से प्रभावी उपचार किया जाता है।
रोकथाम विवरण
अपनी सुरक्षा कैसे करें
PEP (काटने के बाद): ऊपर वर्णित — तुरंत शुरू करें, देरी न करें। PrEP (काटने से पहले/Pre-Exposure Prophylaxis): 2 खुराक (दिन 0, 7) — अनुशंसित: पशु चिकित्सक, वन्यजीव कर्मी, लंबी अवधि के यात्री (>1 माह) ग्रामीण भारत/दक्षिण-पूर्व एशिया/अफ़्रीका में; PrEP लेने वालों को काटने के बाद भी 2 बूस्टर खुराक (दिन 0, 3) चाहिए — लेकिन RIG नहीं। कुत्तों का टीकाकरण (mass dog vaccination): ABC (Animal Birth Control) + ARV — भारत सरकार और नगर निगम कार्यक्रम। आवारा जानवरों को न छुएँ — विशेषकर बंदर, कुत्ते, बिल्ली, चमगादड़। बच्चों को शिक्षित करें — जानवरों से दूरी। काटने पर तुरंत साबुन-पानी से धोएँ → अस्पताल।
तैयारी सबसे अच्छी सुरक्षा है।
यात्रा सलाह
भारत आने वाले विदेशी यात्री: PrEP अत्यधिक अनुशंसित — विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र, 1 माह से अधिक ठहरने वाले, बच्चे। आवारा कुत्तों, बंदरों (मंदिर, पर्यटन स्थल) से दूर रहें। काटने पर: तुरंत साबुन-पानी से 15 मिनट धोएँ → निकटतम अस्पताल में PEP। भारत से विदेश जाने वाले: अफ़्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया में PrEP अनुशंसित। ग्रामीण/दूरदराज़ क्षेत्रों में RIG उपलब्ध नहीं हो सकता — PrEP से RIG की आवश्यकता समाप्त। महत्वपूर्ण: कोई भी पशु-काटना/खरोंच → तुरंत कार्रवाई — "देरी = मृत्यु"।
यह कितना सामान्य है?
सांख्यिकी और भौगोलिक डेटा
भारत: विश्व में सबसे अधिक रेबीज़ मृत्यु — ~20,000/वर्ष (वैश्विक 59,000 का ~36%)। ~95% कुत्ते-मध्यस्थ (dog-mediated)। आवारा कुत्तों की अनुमानित संख्या: 6-8 करोड़। प्रतिवर्ष ~1.5 करोड़ पशु-काटने की घटनाएँ (APCRI सर्वेक्षण)। बच्चे (5-15 वर्ष): सबसे अधिक प्रभावित। ग्रामीण क्षेत्र: 70%+ मृत्यु — PEP तक पहुँच की कमी। राज्यवार: बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल — सर्वाधिक मृत्यु। "Zero by 30": WHO/OIE/FAO लक्ष्य — 2030 तक कुत्ते-मध्यस्थ रेबीज़ से शून्य मानव मृत्यु। भारत: NAPRE (National Action Plan for Rabies Elimination) 2021। वैश्विक: एशिया और अफ़्रीका में 95%+ मृत्यु।
जोखिम कारक
सबसे अधिक जोखिम में कौन है
कुत्ते-जनित रेबीज स्थानिक क्षेत्रों (एशिया, अफ्रीका) में निवास, आवारा कुत्तों से संपर्क, बाल आयु (40% मृत्यु <15 वर्ष), व्यावसायिक जोखिम (पशु चिकित्सक, पशु देखभालकर्ता), चमगादड़ से संपर्क, एक्सपोज़र के बाद PEP न मिलना।
जटिलताओं का विवरण
संभावित जटिलताएँ
रेबीज़ एंसेफ़ेलाइटिस: एक बार लक्षण प्रकट → 99.99% मृत्यु दर। जलभीति/वायुभीति: रेबीज़-विशिष्ट, अत्यंत पीड़ादायक। हृदय विफलता (cardiac failure): मायोकार्डाइटिस। श्वसन विफलता: बल्बर पैरालिसिस। PEP विफलता: अत्यंत दुर्लभ — केवल अनुचित प्रशासन/देरी से। मनोवैज्ञानिक प्रभाव: पशु-काटने के बाद गंभीर चिंता (anxiety)। भारतीय मुद्दा: ग्रामीण क्षेत्रों में PEP/RIG की पहुँच — कई मृत्यु "उपचार न मिलने" या "झाड़-फूँक" (quack treatment) के कारण।
स्वास्थ्य लाभ और संभावनाएं
अपेक्षित परिणाम और स्वास्थ्य लाभ
लक्षण प्रकट होने पर: लगभग 100% घातक। रेबीज़ किसी भी संक्रामक रोग की सबसे अधिक CFR रखता है।
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चिकित्सा साहित्य में नैदानिक रेबीज़ के 20 से कम प्रलेखित उत्तरजीवी (अधिकांश गंभीर तंत्रिका संबंधी अवशिष्ट प्रभावों के साथ)।
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"Milwaukee प्रोटोकॉल" (चिकित्सीय कोमा): दर्जनों मामलों में प्रयास, केवल कुछ उत्तरजीवी, अत्यंत विवादास्पद।
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पूर्व-संपर्क + संपर्क-पश्चात प्रोफिलैक्सिस: लक्षण शुरू होने से पहले सही ढंग से दिए जाने पर 100% प्रभावी।
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संपर्क-पश्चात प्रोफिलैक्सिस (PEP) अवसर: लक्षण प्रकट होने से पहले किसी भी समय (संपर्क के दिनों से महीनों बाद तक) दिया जा सकता है। लक्षण विकसित होने पर PEP निष्फल है।
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मृत्यु आमतौर पर लक्षणों की शुरुआत के 2–10 दिन बाद श्वसन विफलता या हृदय गति रुकने से होती है।
