अवलोकन
गंभीर जीवाणुजनित संक्रमण जो दूषित भोजन और पानी से फैलता है। लंबे समय तक बुखार और प्रणालीगत बीमारी उत्पन्न करता है।
लक्षण
लक्षण | आवृत्ति | गंभीरता | शुरुआत |
|---|---|---|---|
| बुखार | 99% | मध्यम | प्रारंभिक चरण |
| सिरदर्द | 80% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| अस्वस्थता | 75% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| ठंड लगना | 55% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| थकान | 65% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| भूख न लगना | 70% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| मांसपेशियों में दर्द | 60% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| मंद हृदय गति | 40% | हल्का | चरम चरण |
| यकृत वृद्धि | 55% | हल्का | चरम चरण |
| तेज बुखार | 97% | गंभीर | चरम चरण |
| मैकुलोपैपुलर दाने | 20% | हल्का | चरम चरण |
| प्लीहा वृद्धि | 40% | हल्का | चरम चरण |
| पेट दर्द | 50% | हल्का | चरम चरण |
| पेट फूलना | 30% | हल्का | चरम चरण |
| कब्ज | 35% | हल्का | चरम चरण |
| निर्जलीकरण | 30% | मध्यम | चरम चरण |
| दस्त | 40% | हल्का | चरम चरण |
| मतली | 25% | हल्का | चरम चरण |
| उल्टी | 20% | हल्का | चरम चरण |
| गहरे रंग का मूत्र | 15% | हल्का | चरम चरण |
| भ्रम | 15% | गंभीर | अंतिम चरण |
| वजन कम होना | 30% | मध्यम | अंतिम चरण |
| मल में खून | 4% | गंभीर | अंतिम चरण |
संचरण
अवलोकन
दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलने वाला जीवाणु संक्रमण।
अवलोकन
टायफ़ॉइड बुखार (Typhoid Fever / मियादी बुखार / आंत्र ज्वर) साल्मोनेला टाइफ़ी (Salmonella Typhi) जीवाणु द्वारा होने वाला गंभीर प्रणालीगत (systemic) संक्रमण है। मल-मौखिक मार्ग (fecal-oral route) से संचरित — दूषित जल और भोजन। दक्षिण एशिया विश्व में टायफ़ॉइड का प्रमुख केंद्र है, और भारत इसका सबसे बड़ा बोझ वहन करता है।
भारत का टायफ़ॉइड बोझ: अनुमानित 1-2 करोड़ मामले प्रतिवर्ष। WHO Global Burden of Disease अध्ययन के अनुसार भारत विश्व में सर्वाधिक टायफ़ॉइड बोझ वाला देश है। बच्चों (2-15 वर्ष) में घटना दर सर्वाधिक। शहरी मलिन बस्तियों, जहाँ स्वच्छ जल और स्वच्छता की कमी है, में जोखिम विशेष रूप से उच्च।
दवा प्रतिरोध (AMR) — गंभीर चिंता: भारत में बहु-दवा प्रतिरोधी (MDR) और अत्यधिक दवा प्रतिरोधी (XDR) टायफ़ॉइड उभर रहा है। फ़्लोरोक्विनोलोन प्रतिरोध >80%। एज़िथ्रोमाइसिन प्रतिरोध बढ़ रहा है। पाकिस्तान में 2016 से XDR (केवल एज़िथ्रोमाइसिन और कार्बापेनेम संवेदनशील) प्रकोप — भारत में XDR आयातित मामले रिपोर्ट हुए हैं।
2019 में भारत ने UIP में TCV (Typhoid Conjugate Vaccine — Typbar-TCV, भारत में विकसित) शामिल किया — विश्व का पहला TCV कार्यक्रम। IDSP/IHIP अंतर्गत रिपोर्ट योग्य।
आपातकालीन संकेत
अचानक तीव्र पेट दर्द (आंत्र वेधन — शल्य आपातकाल)। पाचन तंत्र से रक्तस्राव (मल में रक्त / मेलेना)। मानसिक भ्रम/प्रलाप। तत्काल अस्पताल।
विस्तृत लक्षण
सबसे सामान्य संकेत और लक्षण
उद्भवन काल: 6-30 दिन (सामान्यतः 8-14 दिन)
प्रथम सप्ताह:
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क्रमिक बढ़ता बुखार (stepladder pattern) → 39-40°C
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सापेक्ष मंदहृदयता (relative bradycardia — Faget sign) — बुखार की तुलना में हृदय गति कम
-
सिरदर्द, अस्वस्थता, भूख न लगना
दूसरा सप्ताह:
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स्थिर उच्च बुखार (sustained/continuous fever)
-
कब्ज (अतिसार से अधिक सामान्य — "मटर-सूप दस्त" बाद में)
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गुलाबी धब्बे (rose spots) — पेट/छाती पर (10-30% में, गहरी त्वचा पर कठिन)
-
प्लीहा वृद्धि (splenomegaly)
-
टायफ़ॉइड अवस्था (typhoid state) — मानसिक भ्रम, उदासीनता, प्रलाप
तीसरा-चौथा सप्ताह: जटिलताओं का जोखिम सर्वाधिक (आंत्र वेधन, रक्तस्राव)
भारत में विशेषताएँ: बच्चों में अतिसार (diarrhoea) अधिक आम। अविशिष्ट बुखार के रूप में प्रस्तुति — मलेरिया, डेंगू से विभेद आवश्यक।
लक्षणों को जानना तेज़ प्रतिक्रिया की दिशा में पहला कदम है।
रोग का क्रम
रोग का सामान्य क्रम (अनुपचारित):
- ऊष्मायन अवधि: 6–30 दिन (औसत 8–14 दिन, खुराक-निर्भर)।
- सप्ताह 1: क्रमिक सीढ़ीनुमा बुखार (~1°C/दिन बढ़ता हुआ), सिरदर्द, अस्वस्थता, सूखी खाँसी, पेट में असुविधा। सापेक्ष मंदनाड़ी (Faget संकेत)।
- सप्ताह 2: निरंतर तेज बुखार (39–40°C), उदर विस्तार, दस्त या कब्ज, यकृतप्लीहावृद्धि। Rose spots (धड़ पर हल्के सैल्मन रंग के धब्बे) 5–30% में।
- सप्ताह 3 ("टाइफाइड अवस्था"): चरम गंभीरता। भ्रम, स्तब्धता। आंत के वेधन और रक्तस्राव का जोखिम सर्वाधिक।
- सप्ताह 4 और उसके बाद: जटिलताओं की अनुपस्थिति में क्रमिक ज्वरमुक्ति। उपचार के बिना बुखार 3–4 सप्ताह तक बना रह सकता है।
एंटीबायोटिक से: आमतौर पर 3–5 दिनों में ज्वरमुक्ति। 2–4 सप्ताह में पूर्ण स्वस्थता।
निदान
इस बीमारी की पहचान कैसे की जाती है
प्रयोगशाला निदान:
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रक्त संवर्धन (Blood culture): स्वर्ण मानक — प्रथम सप्ताह में संवेदनशीलता ~60-80%
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विडाल परीक्षण (Widal test): भारत में व्यापक उपयोग, किंतु कम विश्वसनीय — स्थानिक क्षेत्रों में उच्च पृष्ठभूमि अनुमापांक (background titres)। ICMR इसे एकमात्र निदान उपकरण के रूप में अनुशंसित नहीं करता।
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Typhidot (IgM/IgG): तीव्र बिंदु-देखभाल (point-of-care) परीक्षण
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अस्थि मज्जा संवर्धन (Bone marrow culture): सबसे संवेदनशील (~90%), लेकिन आक्रामक
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दवा संवेदनशीलता परीक्षण (AST): AMR प्रबंधन के लिए अनिवार्य
ICMR/NCDC मार्गदर्शन: रक्त संवर्धन आधारित निदान को प्राथमिकता। विडाल परीक्षण पर अत्यधिक निर्भरता कम करें।
उपचार
उपलब्ध उपचार विधियाँ
एंटीबायोटिक उपचार (दवा संवेदनशीलता अनुसार):
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एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin): 1g एकल खुराक या 500 mg/दिन 5-7 दिन — भारत में प्रथम पंक्ति (MDR मामलों में)
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सेफ़ट्रायक्सोन (Ceftriaxone) IV: गंभीर/जटिल मामलों में, MDR/XDR में
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फ़्लोरोक्विनोलोन (Ciprofloxacin, Ofloxacin): भारत में >80% प्रतिरोध — अब प्रथम पंक्ति नहीं
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डेक्सामेथासोन (Dexamethasone): टायफ़ॉइड अवस्था (गंभीर भ्रम/प्रलाप) में — मृत्यु दर कम करता है
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XDR मामले: मेरोपेनम (Meropenem) IV — अंतिम उपाय
ICMR AMR निगरानी: भारत में टायफ़ॉइड AMR की निगरानी ICMR-AMR नेटवर्क द्वारा की जाती है।
अधिकांश मामलों का शीघ्र निदान से प्रभावी उपचार किया जाता है।
रोकथाम विवरण
अपनी सुरक्षा कैसे करें
भारत का UIP — ऐतिहासिक उपलब्धि:
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TCV (Typhoid Conjugate Vaccine — Typbar-TCV): 2019 से UIP में शामिल — भारत विश्व का पहला देश जिसने TCV को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया
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Typbar-TCV: भारत बायोटेक द्वारा विकसित, WHO पूर्व-अर्हता प्राप्त
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9-12 माह पर एकल खुराक (IM); प्रभावकारिता ~80%
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कैच-अप: 15 वर्ष तक के बच्चों को
अन्य उपलब्ध टीके:
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Typhim Vi (Vi पॉलीसैकेराइड): एकल IM खुराक, 2 वर्ष प्रभावी
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Ty21a (मौखिक): 4 कैप्सूल, 5 वर्ष प्रभावी
जल-स्वच्छता (WASH):
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सुरक्षित पेयजल — उबालना/शोधन
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स्वच्छ भोजन प्रबंधन
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हाथ धोना (साबुन/पानी)
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स्वच्छ भारत मिशन: शौचालय निर्माण और उपयोग → टायफ़ॉइड जोखिम कम
तैयारी सबसे अच्छी सुरक्षा है।
यात्रा सलाह
भारत आने वाले सभी यात्रियों को टायफ़ॉइड टीकाकरण अनुशंसित। भोजन और जल स्वच्छता अत्यंत महत्वपूर्ण — बोतलबंद/उबला पानी, पका हुआ गर्म भोजन, कच्ची सब्ज़ियों/सलाद से सावधानी। सड़क किनारे के भोजन और बर्फ़ से बचें। दक्षिण एशिया (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल) विश्व का प्रमुख टायफ़ॉइड केंद्र है।
यह कितना सामान्य है?
सांख्यिकी और भौगोलिक डेटा
भारत: विश्व में सर्वाधिक टायफ़ॉइड बोझ — अनुमानित 1-2 करोड़ मामले/वर्ष। बच्चों (2-15 वर्ष) में सबसे अधिक। शहरी मलिन बस्तियों में उच्चतम घटना दर। MDR >50%, फ़्लोरोक्विनोलोन प्रतिरोध >80%। TCV (2019 से UIP में) से दीर्घकालिक बोझ में कमी अपेक्षित। ICMR बहु-केंद्रीय निगरानी अध्ययन जारी।
जोखिम कारक
सबसे अधिक जोखिम में कौन है
स्थानिक क्षेत्रों में यात्रा, दूषित भोजन या पानी का सेवन, खराब स्वच्छता प्रथाएँ।
जटिलताओं का विवरण
संभावित जटिलताएँ
जटिलताएँ (अनुपचारित/देर से उपचारित मामलों में):
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आंत्र वेधन (Intestinal perforation): 1-3% — शल्य आपातकाल! भारत में टायफ़ॉइड-संबंधी शल्य आपातकालों का प्रमुख कारण
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आंत्र रक्तस्राव (GI hemorrhage): 1-10%
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विषाक्त हेपेटाइटिस, हृदपेशी शोथ
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सेप्टिक शॉक
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वाहक अवस्था (Carrier state): 1-5% — पित्ताशय में जीवाणु बने रहते हैं, वर्षों तक संक्रमण फैला सकते हैं
मृत्यु दर: उपचार के साथ <1%। बिना उपचार: 10-30%।
स्वास्थ्य लाभ और संभावनाएं
अपेक्षित परिणाम और स्वास्थ्य लाभ
उपचार के साथ: उचित एंटीबायोटिक चिकित्सा से CFR <1%। 2–4 सप्ताह में पूर्ण स्वस्थता अपेक्षित।
उपचार के बिना: CFR 10–30%, मुख्यतः आंतों के रक्तस्राव, वेधन (perforation), या द्वितीयक संक्रमण से।
जटिलताएँ:
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आंत का वेधन: 1–3% (मृत्यु का सबसे सामान्य कारण)।
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जठरांत्र रक्तस्राव: 10–20%।
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पुनरावृत्ति: 5–10% (प्रारंभिक स्वस्थता के 1–3 सप्ताह बाद, आमतौर पर हल्की)।
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दीर्घकालिक वाहकता: 2–5% दीर्घकालिक वाहक बन जाते हैं (>12 महीने मल उत्सर्जन), मुख्यतः पित्ताशय रोग वाली महिलाओं में।
औषध प्रतिरोध: व्यापक रूप से औषध प्रतिरोधी (XDR) टाइफाइड दक्षिण एशिया में बढ़ती चिंता है (azithromycin को छोड़कर सभी प्रथम-पंक्ति मौखिक एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी)। उपचार विकल्पों और पूर्वानुमान को प्रभावित करता है।
