अवलोकन
अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग जो अपरिवर्तनीय पक्षाघात और मृत्यु का कारण बन सकता है। वैश्विक उन्मूलन के निकट लेकिन अभी भी स्थानिक।
लक्षण
लक्षण | आवृत्ति | गंभीरता | शुरुआत |
|---|---|---|---|
| बुखार | 85% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| सिरदर्द | 75% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| अस्वस्थता | 80% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| चिड़चिड़ापन | 30% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| भूख न लगना | 45% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| मतली | 40% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| गले में खराश | 50% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| उल्टी | 35% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| पेट दर्द | 25% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| दस्त | 15% | हल्का | प्रारंभिक चरण |
| पक्षाघात | 1% | गंभीरतम | चरम चरण |
| पीठ दर्द | 20% | मध्यम | चरम चरण |
| निगलने में कठिनाई | 3% | गंभीर | चरम चरण |
| मांसपेशियों में दर्द | 25% | मध्यम | चरम चरण |
| गर्दन में अकड़न | 15% | मध्यम | चरम चरण |
| सांस की तकलीफ | 2% | गंभीरतम | चरम चरण |
| प्रकाश भीति | 10% | हल्का | चरम चरण |
| कब्ज | 20% | हल्का | चरम चरण |
| कंपन | 5% | हल्का | चरम चरण |
| थकान | 80% | हल्का | कोई भी चरण |
संचरण
अवलोकन
पोलियोमायलाइटिस (पोलियो) पोलियोवायरस (एंटरोवायरस, Picornaviridae) द्वारा उत्पन्न रोग है। मल-मौखिक मार्ग से संचरण। 72% लक्षणरहित, <1% पक्षाघाती रूप — अपरिवर्तनीय पक्षाघात। वैश्विक उन्मूलन लगभग प्राप्त: केवल WPV1 अफगानिस्तान/पाकिस्तान में। अपर्याप्त टीकाकरण वाले समुदायों में cVDPV प्रकोप।
अवलोकन
पोलियो (Poliomyelitis) पोलियोवायरस (Poliovirus) द्वारा होने वाला रोग है जो तीव्र शिथिल पक्षाघात (acute flaccid paralysis — AFP) का कारण बन सकता है। भारत ने 2014 में पोलियो-मुक्त प्रमाणन प्राप्त किया — यह भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है! अंतिम जंगली पोलियोवायरस (WPV) का मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में दर्ज हुआ था।
पल्स पोलियो अभियान (Pulse Polio): 1995 से चल रहा राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (NID) अभियान, जिसमें 5 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को OPV की अतिरिक्त खुराकें दी जाती हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है। भारत ने "अंतिम मील" की चुनौतियों — जैसे प्रवासी जनसंख्या, दुर्गम क्षेत्र, और टीका अनिच्छा — को सफलतापूर्वक पार किया।
वैश्विक स्थिति: केवल अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में जंगली पोलियोवायरस टाइप 1 (WPV1) अभी भी फैल रहा है। वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (cVDPV) प्रकोप कई अफ्रीकी और एशियाई देशों में जारी हैं। GPEI (Global Polio Eradication Initiative) ने 1988 से मामलों में >99.9% कमी की है। IDSP/IHIP के अंतर्गत तत्काल अनिवार्य रिपोर्ट योग्य रोग।
आपातकालीन संकेत
किसी भी अंग में अचानक मांसपेशी कमज़ोरी। निगलने या साँस लेने में कठिनाई। बच्चे में तीव्र शिथिल पक्षाघात → तत्काल रिपोर्ट और अस्पताल में भर्ती। AFP हेल्पलाइन: IDSP/IHIP के माध्यम से रिपोर्ट करें।
विस्तृत लक्षण
सबसे सामान्य संकेत और लक्षण
लक्षण स्पेक्ट्रम:
-
90-95% लक्षणरहित (asymptomatic)
-
4-8% अल्प रोग (minor illness): बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी
-
1-2% एसेप्टिक मैनिंजाइटिस (non-paralytic)
पक्षाघाती पोलियो (<1%):
-
तीव्र शिथिल पक्षाघात (AFP) — विषमांग (asymmetric), प्रमुखतः निचले अंगों में
-
मांसपेशी शोष (atrophy), गहरी कण्डरा प्रतिवर्त (deep tendon reflexes) अनुपस्थित
-
संवेदना सामान्य (यह अन्य पक्षाघात कारणों से विभेदक बिंदु है)
बल्बर पोलियो: कपालीय तंत्रिका पक्षाघात, श्वसन विफलता — अत्यंत गंभीर
पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम (Post-polio syndrome): 25-40% उत्तरजीवियों में 15-40 वर्ष बाद — प्रगतिशील मांसपेशी कमज़ोरी, थकान। भारत में पोलियो युग के कई उत्तरजीवी इस स्थिति से प्रभावित हैं।
लक्षणों को जानना तेज़ प्रतिक्रिया की दिशा में पहला कदम है।
रोग का क्रम
रोग का सामान्य क्रम (पक्षाघाती पोलियो):
- ऊष्मायन अवधि: 7–21 दिन (सीमा 3–35 दिन)।
- लघु बीमारी (1–3 दिन): बुखार, गले में दर्द, अस्वस्थता, सिरदर्द, जी मिचलाना, उल्टी। ~24% संक्रमणों में ठीक (अबोर्टिव पोलियो)।
- CNS चरण / मुख्य बीमारी (1–3 दिन): बुखार, सिरदर्द, गर्दन की अकड़न, मस्तिष्कावरण संकेतों की पुनरावृत्ति। माँसपेशियों में दर्द और ऐंठन।
- पक्षाघाती चरण (घंटों से दिनों): असममित शिथिल पक्षाघात, आमतौर पर पैर > भुजाएँ। अधिकतम पक्षाघात सामान्यतः 3–4 दिनों में विकसित। समीपस्थ > दूरस्थ। कोई संवेदी हानि नहीं (शुद्ध गतिशीलता)।
- स्वस्थता (सप्ताहों से महीनों): 6 महीने में अधिकतम पुनर्प्राप्ति। 2 वर्ष तक शक्ति में धीमा सुधार जारी रह सकता है।
मेरुदंडीय बनाम बल्बर: मेरुदंडीय पोलियो (अंग पक्षाघात) सबसे सामान्य। बल्बर पोलियो में कपालीय तंत्रिकाएँ और श्वसन केंद्र शामिल — चिकित्सा आपातकाल।
निदान
इस बीमारी की पहचान कैसे की जाती है
निदान:
-
मल (stool) से वायरस पृथक्करण — स्वर्ण मानक (gold standard)। दो मल नमूने, 24-48 घंटे के अंतराल पर
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PCR — जंगली और वैक्सीन-व्युत्पन्न वायरस में विभेद
-
AFP निगरानी: भारत में 15 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे में AFP का प्रत्येक मामला तत्काल रिपोर्ट और जाँच अनिवार्य
-
भारत में AFP निगरानी दर विश्व में सर्वोच्च में से एक है (>2/100,000 <15 वर्ष)
उपचार
उपलब्ध उपचार विधियाँ
उपचार — केवल सहायक:
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विश्राम, दर्दनाशक
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श्वसन सहायता (वेंटिलेटर) — बल्बर प्रकार में
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शारीरिक पुनर्वास (physiotherapy) — दीर्घकालिक
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ऑर्थोटिक उपकरण (braces, calipers)
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कोई एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं
भारत में: NIOH (National Institute for Orthopaedically Handicapped) और ALIMCO पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करते हैं।
अधिकांश मामलों का शीघ्र निदान से प्रभावी उपचार किया जाता है।
रोकथाम विवरण
अपनी सुरक्षा कैसे करें
टीकाकरण — भारत का UIP:
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जन्म पर: OPV शून्य खुराक (OPV-0)
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6, 10, 14 सप्ताह: OPV + IPV (निष्क्रिय पोलियो टीका)
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14 सप्ताह पर: fIPV (fractional dose IPV — अंतर्त्वचीय)
-
बूस्टर: 16-24 माह पर OPV
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पल्स पोलियो (राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस — NID): वर्ष में 2-3 बार, 5 वर्ष से कम सभी बच्चों को OPV
भारत की सफलता की कहानी: 2009 में भारत में 741 पोलियो मामले थे → 2011 में अंतिम मामला → 2014 में पोलियो-मुक्त प्रमाणित। सफलता के कारक: पल्स पोलियो, सूक्ष्म नियोजन (microplanning), ASHA/ANM कार्यकर्ताओं का समर्पण, सामुदायिक सहभागिता।
तैयारी सबसे अच्छी सुरक्षा है।
यात्रा सलाह
यात्रियों के लिए:
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पोलियो-स्थानिक क्षेत्रों (अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान) की यात्रा से पहले IPV बूस्टर
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अंतरराष्ट्रीय टीकाकरण प्रमाणपत्र (CIVP) आवश्यक हो सकता है
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भारत से पाकिस्तान/अफ़ग़ानिस्तान यात्रा: OPV/IPV बूस्टर अनुशंसित
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मल-मौखिक (fecal-oral) स्वच्छता का कड़ाई से पालन
यह कितना सामान्य है?
सांख्यिकी और भौगोलिक डेटा
भारत: 2014 से पोलियो-मुक्त प्रमाणित। अंतिम WPV मामला: 13 जनवरी 2011, हावड़ा, पश्चिम बंगाल। वैश्विक: अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में WPV1 जारी। cVDPV प्रकोप: अफ्रीका, एशिया। भारत सतर्कता बनाए रखता है — AFP निगरानी, पर्यावरणीय निगरानी (सीवेज सैंपलिंग), और पल्स पोलियो जारी।
जोखिम कारक
सबसे अधिक जोखिम में कौन है
अपूर्ण टीकाकरण, स्थानिक/प्रकोप क्षेत्रों में निवास, खराब स्वच्छता, प्रतिरक्षाकमी (दीर्घकालिक वायरस उत्सर्जन, VDPV)।
जटिलताओं का विवरण
संभावित जटिलताएँ
जटिलताएँ:
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स्थायी शिथिल पक्षाघात — विकलांगता
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श्वसन विफलता (बल्बर प्रकार: मृत्यु दर 25-75%)
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अस्थि-संधि विकृतियाँ (skeletal deformities)
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पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम (15-40 वर्ष बाद): प्रगतिशील कमज़ोरी, थकान, दर्द
स्वास्थ्य लाभ और संभावनाएं
अपेक्षित परिणाम और स्वास्थ्य लाभ
लक्षणहीन संक्रमण: 72% मामले। कोई अवशिष्ट प्रभाव नहीं।
अबोर्टिव पोलियो (लघु बीमारी): 24%। पूर्ण स्वस्थता।
गैर-पक्षाघाती असेप्टिक मेनिंजाइटिस: 1–5%। 2–10 दिनों में पूर्ण स्वस्थता।
पक्षाघाती पोलियो: 0.5–1% संक्रमण।
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CFR: बच्चों में 2–5%, वयस्कों में 15–30% (श्वसन माँसपेशी सम्मिलन)।
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बल्बर पोलियो (मस्तिष्क तना सम्मिलन): CFR 25–75%।
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60% में 6–12 महीनों में पक्षाघात की आंशिक या पूर्ण पुनर्प्राप्ति। अवशिष्ट पक्षाघात स्थायी होता है।
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पोस्ट-पोलियो सिंड्रोम: 25–40% पक्षाघाती पोलियो उत्तरजीवियों में 15–40 वर्ष बाद नई कमजोरी, थकान और माँसपेशी क्षय विकसित होते हैं।
